09वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद

प्रादेशिक आर्म्‍ड कांस्टेबुलरी

09वीं वाहिनी का इतिहास

वर्ष -1991 में तिब्बत चीन सीमा सुरक्षा दायित्व भारत तिब्बत सीमा पुलिस (गृह मत्रांलय भारत सरकार) को सौंप कर इस वाहिनी को एस0पी0एफ0 से सामान्य पीएसी से परिवर्तन होने हेतु प्रक्रिया पूर्ण होने का समय था] उस समय वाहिनी का मात्र एक प्लाटून श्री बद्रीनाथ धाम की सुरक्षार्थ जोशीमठ एवं श्री बद्रीनाथ में नियुक्त रहता था।

जोशीमठ के क्वार्टर गार्द पर लिखी यह शपथ आज भी स्मरणीय है-

मैं सीमा प्रहरी अपने शस्त्रों का अपमान नहीं होने दूँगा और न ही अपने उन साथियों का परित्याग करूँगा] जो अकेले या समूह में मेरे साथ है। मैं देश की प्रत्येक पावन वस्तु की रक्षा करूँगा। मैं जिम्मेदारी में मिले अपने क्षेत्र को घटाकर नहीं वरन इसमें वृद्वि कर उसे गौरवपूर्ण स्थिति में सौपूँगा।

एस0पी0एफ0 ने अपने स्थापना से अब तक के कार्यकाल में इस शपथ का पूर्णतः पालन किया है किन्तु इस वाहिनी द्वारा विषम परिस्थितियों में रचित स्वर्णिम इतिहास को उतना महत्व नहीं मिला जिसकी यह वाहिनी वास्तिविक रूप से हकदार थी।

स्थापना

इस वाहिनी की स्थापना 04 अक्टूबर 1947 को लैसडाउन जनपद पौड़ी गठ़वाल उ0प्र0 (वर्तमान में उत्तराखण्ड) में मिलिट्री पुलिस वाहिनी के रूप में की गयी थी, इस वाहिनी के प्रथम सेनानायक श्री लीला सिंह बिष्ट बनाये गये थे। इस वाहिनी को उत्तर प्रदेष के जनपद अल्मोड़ा टिहरी गढ़वाल तथा गढ़वाल (कालान्तर में क्रमशः जनपद पिथौरागढ़ उत्तरकाशी तथा चमोली, उत्तराखण्ड) की तिब्बत सीमा से लगी सीमा से लगे क्षेत्र में व्यापार नियत्रंण हेतु इस वाहिनी को नियुक्त किया गया। वर्श-1953 से तिब्बत में चीन की गतिविधियाँ बढ़ने तथा उसके पष्चात तिब्बत पर चीन द्वारा कब्जा करने तथा दलाईलामा द्वारा भारत में शरण लेने पर इन मार्गों से व्यापार बन्द हो गया था। वर्ष 1953 से 1959 तक इस वाहिनी को अभिसूचना विभाग उत्तर प्रदेश के नियंत्रण में रखा गया। सन 1959 में इस वाहिनी का नियंत्रण सेना को सौंप दिया गया। वर्ष 1962 में चीन द्वारा भारत में शरण लेने पर इन मार्गों से व्यापार बन्द हो गया था। वर्ष 1953 से 1959 तक इस वाहिनी को अभिसूचना विभाग उत्तर प्रदेश के नियंत्रण में रखा गया। सन 1959 में इस वाहिनी का नियंत्रण सेना को सौंप दिया गया। वर्श 1962 में चीन द्वारा लद्दाख एवं नेफा (नार्थ ईस्ट फ्रन्टियर एरिया) क्षेत्र से भारत पर आक्रमण करने से राज्य की तिब्बत से लगी पर्वतीय सीमा की सुरक्षा का उत्तरदायित्व इस वाहिनी को सौपा गया। वर्श 1966 में सेना ने सीमा की सुरक्षा बार्डर स्काउट नाम से एक विशेष बल का गठन किया, परन्तु अन्तराष्ट्रीय सैन्य समझौतों के अन्तर्गत अन्तराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा का दायित्व देश के गृह विभाग के अन्तर्गत रखने के निर्देश के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। पुनः वर्ष-1967 में सीमा की सुरक्षा का दायित्व इस वाहिनी को सौंपा गया, परन्तु इसका आप्रेशनल नियंत्रण सेना के पास रहा।

वाहिनी मुख्यालय

स्थापना के समय इस वाहिनी का मुख्यालय गढ़वाल राइफल रैजीमेन्ट सेन्टर लैमडाउन के भवनों में गढ़वाल मिलिट्री पुलिस वाहिनी के रूप में स्थापित किया गया। वर्ष-1950 में नवीं वाहिनी एस0पी0एफ0 के रूप में इसका मुख्यालय मुरादाबाद में सालवेशन आर्मी के चिकित्सालय के भवनों में स्थापित किया गया, जहाँ यह वाहिनी आज भी स्थापित है। वाहिनी की सीमा से लगी जी0आर0पी0 लाइन की भूमि को हस्तान्तरित कर पारिवारिक आवासों का निर्माण कराया गया तथा पी0टी0सी0 प्रथम से भूमि लेकर परेड़ ग्राउण्ड की व्यवस्था की गयी। कालान्तर में इस वाहिनी से भवनों एवं भूमि की व्यवस्था कर क्रमशः 23/24 वीं वाहिनी पीएसी स्थापित की गयी।

वाहिनी द्वारा सम्पादित दुर्गम/महत्वपूर्ण डियूटियाँ

वर्ष-1947 से 1991 तक इस वाहिनी ने भारत तिब्बत सीमा पर सेना से अग्रिम चौकियों पर रहकर 18000 फिट ऊँचे हिमाच्छादित पर्वतों एवं पहाड़ों पर दुर्गम व विषम परिस्थितियों में सराहनीय कार्य कर भारत भूमि की रक्षा की तथा समय-समय पर सेना एवं स्थानीय जनता की प्रशंसा एवं विश्वास अर्जित किया तथा वर्ष-1949 में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री माननीय सरदार बललभ भाई पटेल की सुरक्षा में इस वाहिनी का योगदान विशेष सराहनीय रहा।

वाहिनी द्वारा किया गया विशेष सराहनीय कार्य

वर्ष-1976 में साहसिक अभियान समुद्र से आकाश के दौरान अभियान के नायक तथा प्रथम एवरेस्ट विजेता सर एडमण्ड हिलेरी के बद्रीनाथ के पास गायव होने की सूचना जब बी0बी0सी0 लन्दन द्वारा प्रसारित की गयी तब केन्द्र सरकार के गृह विभाग का एक मात्र विश्वस्त सूचना तंत्र भारत तिब्बत सीमा पर एस0पी0एफ0 ही था। तत्काल हैड क्वा0 से सूचना माणा कैम्प पहुँचीं तथा ए0पी0एफ0 की एक टुकड़ी मुख्य आरक्षी बलवन्त सिंह के नेतृत्व में सर हिलेरी को खोजने नर पर्वत पर तुरन्त चल पड़ी। सर हिलेरी को बताया गया था कि नर पर्वत पर अभी तक कोई मानव नहीं पहुँच पाया आप वहां न जाये, किन्तु वह नहीं माने। माना जाता है कि नर पर्वत पर विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों एवं फूलों से निकलने वाली गध से मानव मूर्छित हो जाता था। किसी तरह एस0पी0एफ0 की टुकड़ी सर हिलेरी तक पहुँची तब तक भारतीय वायु सेना का हैलीकाप्टर सर हिलेरी की खोज में आकाश में मडराने लगा। एस0पी0एफ0 की टुकड़ी ने किसी तरह धुँआ करके घटना स्थल को प्रदर्शित किया तब सर हिलेरी को एयर लिफट करके दिल्ली ले जाया गया। इस अभियान में भारतीय वायु सेना की प्रशंसा इग्लैण्ड तक हुई किन्तु एस0पी0एफ0 द्वारा किया गया सराहनीय कार्य नीव के पत्थर की तरह हमेशा के लिये दव कर रहा गया।

वाहिनी का संगठन

इस वाहिनी में प्रारम्भ से ही पीएसी की अन्य वाहिनियों की अपेक्षा एक कम्पनी अधिक अर्थात 09 कम्पनियां थी। सामान्य पीएसी वाहिनी में परिवर्तित होने से पूर्व एस0पी0एफ0 में सेनानायक एवं उपसेनानायक (दोनों आई0पी0एस0) ज्येष्ठ सहायक सेनानायक वरिष्ठ पुलिस उपाधीक्षक स्तर) 12 चिकित्साधिकारी, 28 फार्मासिस्ट एवं 28 नर्सिग सहायक रहते थे। रेडियो शाखा में सहायक रेडियो अधिकारी रेडियो निरीक्षक एवं रेडियो संचारण अधिकारी-04, रेडियो केन्द्र अधिकारी-11 प्रधान परिचालक-98 सहायक परिचालक 12 एवं आशुलिपिक इत्यादि थे। उन दिनों एस0पी0एफ0 के सेनानायक का पद अति महत्वपूर्ण एवं गौरवशाली माना जाता था।

प्रत्येक कम्पनी में एक कम्पनी कमांडर पुलिस उपाधीक्षक स्तर एक सहायक कम्पनी कमान्डर निरीक्षक स्तर 03 प्लाटून कमांडर उपनिरीक्षक स्तर 22 मुख्य आरक्षी, 97 आरक्षी 12 अनुचर एवं 8 से 12 तक जी0पी0 (राजकीय श्रमिक) होते थे। एस0पी0एफ0 का डियूटी क्षेत्र 03 सेक्टर्स क्रमशः जोशीमठ उत्तरकाशी एवं अस्कोट मे विभाजित था जोशीमठ सेक्टर में 03 कम्पनी अस्कोट सेक्टर में 02 कम्पनी तथा उत्तरकाशी सेक्टर में 01 कम्पनी रहती थी तथा 01 कम्पनी वाहिनी मुख्यालय सुरक्षा डियूटी में तथा दो कम्पनी सदैव वाहिनी में प्रशिक्षणरत रहती थी। क्रमानुसार प्रत्येक दो वर्ष बाद कम्पनी वाहिनी मुख्यालय में डियूटी/प्रशिक्षण हेतु व्यवस्थापित होती थी। सेनानायक का मुख्यालय जोशीमठ में तथा उपसेनानायक का कार्यालय मुरादाबाद वाहिनी में हुआ करता था।

सामान्य  पीएसी वाहिनी में परिवर्तित होने पर एस0पी0एफ0 के अतिरिक्त पद समाप्त कर दिये गये परन्तु वाहिनी में अब भी 09 कम्पनियों कर्त्तव्यरत थी। वर्ष-2012 एवं 2013 में जनशक्ति की कमी को देखते हुए वाहिनी के 03 दलों को अक्रियाशील कर दिया गया है। वर्तमान में वाहिनी में 06 दल क्रियाशील हैं। वर्ष-2013 में 09वीं वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद को प्रदेश की सर्वोत्तम वाहिनी होने का गौरव प्राप्त हुआ।

जनपद- पिथोरागढ़ के अस्कोट सेक्टर  के मुन्सारी में एक कम्पनी एवं धारचूला में एक कम्पनी ड्यूटीरत रहती थी।

1- मुन्सवारी के भदेली में सप्लाई प्वाइट था जहों से पोस्टो पर राशन आदि का समान सप्लाई किया जाता था लीलम एवं वुगडियार में कभी-कभी डेढ़ सेक्शन व्यास्थापित की जाती थी तथा मिलम एवं व्यवस्थापित किया जाता था।

2- धारचूला के कुट्टी में सप्लाई प्वांइट रहता था। जहों से पोस्टों पर राशन आदि का सामान सप्लाई किया जाता था तथा तत्वाघाट जिप्ती एवं कालापानी में एक एक प्लाटून डयूटी हेतु व्यास्थापित रहता था।

जोशीमठ सेक्टर के माडा भैली एवं मलारी भैली में 03 कम्पनियों व्यवस्थपित रहती थी।

1- माडा भैली के घसरौली में सप्लाई प्वाइट रहता था जहा से पोस्टों पर राशन आदि सामान सप्लाई किया जाता था माडा रत्ताकोना एवं बद्रीनाथ में एक एक प्लाटून डयूटी हेतु व्यवस्थापित रहता था।

2- मलारी भैली रिमखिम एवं सौबला में एक एक प्लाटून तथा लपतल में एक कम्पनी डयूटी हेतु व्यवस्थापित रहती थी।

उत्तरकाशी सेक्टर में कम्पनियों का व्यवस्थापन।

1- कम्पनी का मुखयाल मैलांग में रहता था डवरानी सोनम कारछा एवं घूमतू में ट्रांजीट कैम्प रहता था हरसील और कौपांग में डेढ सेक्शन व्यवस्थापित रहती थी

2- सामान्य पीएसी वाहिनी में परिवर्तीत होने पर एस0पी0एफ0 के अतिरिक्त पद समाप्त कर दिये गये परन्तु वाहिनी में अब भी 09 कम्पनियों कर्तवयरत् है।

रचानात्मक कार्यः

समय समय पर तत्कालीन सेनानायकों द्वारा वाहिनी में जवानो ंकी सुख सुविधा कल्याणर्थ एवं वाहिनी के विकास हेतु समय समय पर विभिन्न रचनात्मक क्ब्श्े कराये गये परन्तु एक संवेदनशील व्यक्त्तिव कवि ख्याति प्राप्त लेखक, रचनात्मक प्रकृति के धनी कर्तव्यनिष्ठ एवं सुयोग्य आईपीएस अधिकारी स्वा0श्री गिरिराज साह द्वारा कराये गये कार्याें हेतु यह वाहिनी तथा वाहिनी के अधिकारी द्वारा वाहिनी के अतिथि गृह को कलात्मक वस्तुओं एंव सुविधाओं से सुसज्जित कर मुरादाबाद के अग्रेणी अतिथि ग्रहों में स्थान दिलाया उल्लेखनीय है कि पुलिस सैना के उच्चाधिकारियों सहित इस वाहिनी के अतिथि ग्रह को तत्कालीन गृह मंत्री भारत श्री बूटा सिंह को ठहराने का भी गौरव प्राप्त हो चुका है।

श्री शाह ने वर्ष 1989-9़0 में सीमा पर कर्तव्य की बलीबेदी पर शहीद हुये जवानों की स्मृति में सफेद काले पत्थर से सुन्दर एवं कलात्मक शहीद स्मारक बनवाया जो वाहिनी के सीमा पर शहीद हुये वीर जवानों की शहादत का साक्षी हैं।

वाहिनी के विकास एवं प्रगति को इस कड़ी में श्री आलोक शर्मा सेनानायक द्वारा अपने लगभग 15 माह के कार्यकाल मे सीमित संसोधनों से वाहिनी के विकास एवं जवानोे के कल्याणार्थ कराये गये कार्य भी सदैव स्मरण किये जायेंगे जिनमें वाहिनी के चिकित्सालय मे लस्थमा सेन्टर की स्थापना एवं व्लड शुगर की जांच हेतु उपकरणों की उपलब्धता जवानों द्वार श्रमदान से निर्मित वेट कैन्टीन ब्रदी्रविशाल कालोनी आवसीय लाइन की स्थापना वाहिनी परविार की महिलाओं द्वार संचालित थ्रिप्ट एण्ड क्रेडिट गु्रप मिनी बैक की स्थापना निसंदेह प्रशासनीय हैै श्री षर्मा द्वारा वाहिनी जोन एवं यूपी अभिरूचि लेते हुये निरन्तर गुणाप्मक सुधार कियसे जाने के क्रम में यु0पी पुलिस की टीमों में यूवा व नये खिलाड़ियों को चयनित होने का अवसर दिया, वाहिनी एवं प्रदेश पुलिस की टीमों में ये एवं प्रतिभावान खिलाडियों का चयन कर यू0पी0 पुलिस की टीमों को नई उर्जा देने पर बल दिया। श्री शर्मा द्वारा वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस स्पोर्टस कन्ट्रोल बोर्ड की वार्षिक गोष्ठी में खेल की सुविधाओं को देखते हुये नवी वाहिनी को बालीवाल कबडडी एवं तैराकी का सेंटर आफ एक्सीलेन्स बनाने हेतु प्रयास किया गया तथा इस वाहिनी द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस को विभिन्न खेलों जैसे भारोत्तोलन फुटबाल, हैण्डबाल टीमों के मुख्य प्रशिक्षक कोच उपलब्ध कराये गये है जिनके द्वारा अपनी सेवाऐ आज भी उत्तर प्रदेश पुलिस को दी जा रही है।

वाहिनी के विकास एवं प्रगति की उपरोक्त कड़ी में श्री पीयूष मोर्डिया सेनानायक द्वारा वाहिनी में प्रकाश व्यवस्था को दुरूस्त एवं वेदान्ता फाउन्डेशन नाम स्वयसेवी संस्था के सहयोग से वाहिनी के जवानों एवं परिवारजनों को कम्पुटर प्रषिक्षण की ओर प्रेरित कर कम्प्यूटर लैब स्थापित करायी गयी,टर्न आउट एवं ड्रिल के क्षेत्र में इस वाहिनी का प्रदर्शन सदैव अन्य वाहिनियों के लिये अनुकरणीय रहा है इस वाहिनी का एक प्लाटून सदैव प्रत्येक वर्ष वार्षिक पुलिस रैतिक परेड में भाग लेता रहा है तथा प्लाटून द्वारा लगातार कई वर्ष पुलिस परेड में ड्रिल एवं टर्न आउट का उत्कृष्ट प्रदर्षन कर प्रथम स्थान प्राप्त करते हुऐ महामहिम राज्यपाल माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं पुलिस माहनिदेशक स्तर के अधिकारियों की प्रशंसा अर्जित की जाती रही है।

सेनानायक श्री अशोक कुमार द्वारा अपने अथक प्रयास से पुलिस माडर्न स्कूल का विस्तारीकरण एवं वाहिनी के शहीद स्मारक पर चौरा-चोरी महोत्सव के शताब्दी वर्ष के रूम में कार्यक्रम आयोजित कर वाहिनी के शहीद स्मारक को रख-रखाव उच्चकोटि का कराया गया।

वाहिनी में जवानों के कल्याणार्थ स्थापित संस्थान-

वाहिनी में जवानों के कल्याण हेतु एवं सुविधाओं को ध्यान में रखते हुऐ वर्तमान में निम्नांकित संसाधन उपलब्ध है जिनका लाभ जवानों परिवारों द्वारा लिया जा रहा हैै।

  • राशन शाप
  • चक्की/तेल कोल्हू एवं मसाला चक्की
  • परिवार कल्याण केन्द्र
  • तरणाताल
  • पोस्ट ऑफिस
  • मास्टर कैन्टीन
  • कम्प्यूटर प्रशिक्षण हेतु लैब
  • राज्य कर्मचारी कल्याण निगम कैन्टीन
  • वेट कैन्टीन
  • मनोरंजन ग्रह
  • गैस एजैसी
  • पुलिस माडर्न स्कूल
  • बच्चा पार्क

वाहिनी द्वारा प्रदेश के बाहर संपादित डयूटिया

वर्ष 1982 में केंन्द्र सरकार के निर्देश पर दो दलो द्वारा असम राज्य में चुनाव डयूटी।

  • वर्ष 1985 में केंन्द्र सरकार के निर्देश पर 03 दलो द्वारा पंजाब मे विधान सभा चुनाव डयूटी।
  • वर्ष 1992 में केंन्द्र सरकार के निर्देश पर 04 दलो द्वारा दिल्ली मे विधान सभा चुनाव डयूटी।
  • वर्ष 1992 से समय समय पर दिल्ली मे वाहिनी के दलो द्वारा वीआइपी सुरक्षा डयूटी।
  • वर्ष 1993 में 06 दलो द्वारा नागालैंड मे विधान सभा चुनाव डयूटी।
  • वर्ष 2000 में 01 दल द्वारा उत्तराखण्ड राज्य मे हरिद्वार मे कांवड मेला डयूटी।
  • वर्ष 2007 में 02 दलो द्वारा उत्तराखण्ड मे विधान सभा उपचुनाव डयूटी।
  • वर्ष 2007 में 02 दलो द्वारा गुजरात मे विधान सभा चुनाव डयूटी।
  • वर्ष 2010 में 02 दलो द्वारा उत्तराखण्ड मे महाकुम्भ मेला -2010 हरिद्वार मेला डयूटी।
  • वर्ष 2012 में वाहिनी का एच- दल सहायक सेनानायक श्री आन्नदवीर सिंह एवं दलनायक श्री प्रकाश राम आर्या के पर्यवेक्षण में दिनांक 15-11-2012 से 17-12-2012 तक गुजरात मे सामान्य विधान सभा चुनाव 2012 को कुश्ल संपन्न कराये।
  • वर्ष 2013 में सेनानायक श्रीमती अपर्णा कुमार के अथक परिश्रम एवं मेहनत से तथा वाहिनी के अधिकारी/जवानो के द्वारा कडी मेहनत से किए गये कार्य से पूरे प्रदेश मे वाहिनी को सर्वोत्तम वाहिनी होने का गौरव हासिल हुआ।
  • वर्ष 2016 में वाहिनी का ई- दल द्वारा उत्तराखण्ड राज्य मे आयोजित अर्द्धकुम्भ मेला डियूटी संपादित की गयी।
  • वर्ष 2018 में वाहिनी का सी- दल द्वारा विधान सभा चुनाव त्रिपुरा, नागालैण्ड मे तथा डी -दल द्वारा कर्नाटक राज्य मे विधान सभा चुनाव डियुटी संपादित की गयी।
  • वर्ष 2021 में जनपद हरिद्वार , उत्तराखण्ड लगने वाले महाकुम्भ-2021 मे वाहिनी के ई-दल द्वारा कडी मेहनत एवं लगन से डियुटी संपादित की गयी। उपरोक्त के अतिरिक्त इस वाहिनी के दलो द्वारा माननीय राज्यपाल महोदय , उ0प्र0 सरकार तथा हाउस गार्द के अर्न्तगत विभिन्न माननीयों की सुरक्षा के साथ-साथ धार्मिक स्थलों की सुरक्षा इस वाहिनी के दलों द्वारा  कठिन परिश्रम व निश्ठा से की गयी है।
  • वर्ष 2022 में वाहिनी के डी-दल द्वारा गुजरात राज्य मे विधान सभा सामान्य निर्वाचन मे कडी मेहनत, लगन एवं पूर्ण निश्ठा के साथ डियुटी संपादित की गयी, जिसकी उच्चाधिकारीयो द्वारा सराहना की गयी।

अन्य उपलब्धियां

सेनानायक श्रीमती अपर्णा कुमार का एवरेस्ट अभियान के लिए चयन हुआ जिसमे 19 लोगो मे इकलौती भारतीय थी लेकिन हिमस्खलन के कारण 16 सेरपाओं की मृत्यु होने के कारण अभियान निरस्त  किया गया। दिनांक 27-04-2014 को सेनानायक द्वारा लोबुचे ईस्ट चोटी जिसकी ऊचाई 6119 मीटर है , पर पीएसी का झण्डा फहराया गया।

प्रदेश के अन्दर संपादित महत्वपूर्ण डियुटियांः- वाहिनी के दलो को प्रदेश के अन्दर सामान्य कानूून व्यवस्था डियुटी के अतिरिक्त निम्नलिखित महत्वपुर्ण कर्तव्य समय-समय पर दिये जाते रहे है, जिनका निष्पादन वहिनी के दलो द्वारा पूर्ण निष्ठा एवं सर्तकता के साथ किया गया है।

  • एंटी नक्सलाईट डियूटी ।
  • राजभवन/हाउस गार्द डियूटी
  • सी0आर0 सुरक्षा डियूटी ।
  • धार्मिक स्थल सुरक्षा डियूटी ।
  • हाउस गार्द सुरक्षा डियूटी ।
  • लोक सभा चुनाव डियूटी ।

विशेष सराहनीय कार्य

  •  दिनांक-30-11-2010 को जजी परिसर जनपद बिजनौर मे कुख्यात अपराधी युनुश को स्थानीय पुलिस पेशी पर लेकर आयी, तो इस अपराधी द्वारा पुलिस की ऑखो मे मिर्च डालकर भागने का प्रयास किया गया परन्तु इस वाहिनी का दल जजी सुरक्षा में नियुक्त था दल के आरक्षी प्रशांन्त कुमार द्वारा उक्त अपराधी को अपनी जान की परवाह किये बिना दौड़ कर पकड़ लिया जिसकी प्रशंसा स्थानीय पुलिस के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय व्यक्तियों व मिडिया द्वारा की गई है।
  • आरक्षी 080480046 प्रताप सिंह धामी राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केन्द्र सीमा सुरक्षा बल टैकनपुर ग्वालियर म0प्रे0 में सर्च एवं रेस्क्यू श्वान प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशिक्षण के दौरान एक वैगानार कार 05 फिट गहरे पानी में चली गयी, प्रशिक्षणाधीन कर्मियों द्वारा सूझ-बूझ का परिचय देते हुए रेस्क्यू करते हुए कार को बाहर निकाला गया जिसके फलस्वरूप दो बच्चो एवं दो महिलाओं सहित कुल पॉच व्यक्तियों की जान बचा ली गई। जिसकी पुलिस महानिदेश पीएसी मुख्यालय उ0प्र0 लखनऊ के पत्र संख्याः पीएसी-11-70(3)2018/992 दिनांक-10-09-2018 के द्वारा रू0 500-00 के नकद पुरूस्कार से पुरस्कृत किया गया।
  • वाहिनी के डी दल द्वारा जनपद कानपुर दैहात में एन्टी डकैती ड्यूटी हेतु थाना मूसा नगर में ड्यूटी के दौरान दिनांक-24-02-2005 को एक सैक्शन पीएसी नागरिक पुलिस के उप0नि0 श्री सुखीराम पाल के हमराह मय आर्म्स/एम्यूनेशन के थाना क्षेत्र में सेगुर नदी पर दो व्यक्ति जिनमें से एक के पास 315 बोर रायफल तथा दूसरे व्यक्ति के पास देषी बम दिखाई दिया। यह दोनों व्यक्ति फोर्स को देखते ही जान से मारने की दमकी देते हुए फायर करने लगे। इस मुठभेड़ के दौरान सैक्शन के जवानों ने विशम परिस्थितियों में अदम्य साहस एवं धैर्य के साथ उनके नजदीक पहुॅचकर उनको गिरफ्तार किया। उक्त दोनों व्यक्तियों की तलाशी लेने पर 315 बौर देषी रायफल के साथ 3 अद््द जिन्दा कारतूस एवं 4 अद्द खोका एवं दूसरे व्यक्ति के पास 5 देषी बम बरामद किये गये। इन दोनों व्यक्तियों का नाम एवं पता पूछने पर एक ने अपना नाम भारत सिंह पुत्र श्री गंगाराम तथा दूसरे ने अपना नाम लाल चन्द पुत्र श्री छिद्दा निवासी शैहारी थाना मूसा नगर, कानपुर दैहात बताया इस प्रकार सख्ती से पूछताछ करने पर इनके द्वारा बिजली के तारों की चोरी कर अपने घरों मे रखा हुआ बताया तथा वह दोनों डकैत रंज्जन, चंन्दन, पीला एवं निर्भय गुर्ज्जर को असला बनाकर देते है। इस प्रकार इस वाहिनी की सैक्शन द्वारा माह फरवरी 2005 में एन्टी डकैती ड्यूटी के दौरान कुख्यात डकैतों को असला बनाकर देने वाले दो अभियुक्तों को 315 बौर रायफल मय कारतूस 5 देशी बम एवं बिजली के गले हुये तार के साथ गिरफ्तार कर कामयाबी हासिल की गई।

 

 धरोहर

  1. बैरक- इस वाहिनी में मात्र एक बैरक वर्तमान में बनायी गयी है। शेष सभी बैरक अंगेजी काल की निर्मित है, जिसको वाहिनी स्तर पर मरम्मत आदि कराकर रहने योग्य बनाया गया है, जो एक एतिहासिक धरोहर है। इन बैरको का निर्माण इस प्रकार से तैयार किया गया है कि इनमें गर्मी एवं सर्दी का प्रभाव कम पड़ता है।
  2. सैण्ड मॉडल- इस वाहिनी की ड्यूटी जब तिब्बत/चीन बार्डर पर रहती है, तब वाहिनी से कर्मियों को ड्यूटी हेतु उनके सेक्टरों में भेजा जाता था, तब उनको सैण्ड मॉडल के माध्यम से उसको ड्यूटी पॉइनट तक जाने एवं ड्यूटी क सम्बन्ध में ब्रीफ कर रवाना किया जाता था, जिसका उत्तराखण्ड बनने के उपरान्त महत्व लगभग समाप्त हो गया है, परन्तु इस सैण्ड मॉडल को धरोहर के रूप में वाहिनी में सजोया गया है। बाहर से वाहिनी में आगमन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इसके बारे में बताया जाता है।
  3. पेड़/वृक्ष- यह वाहिनी अत्यधिक पुरानी होने के साथ-साथ इस वाहिनी में बहुत ही पुराने वृक्ष विद्यमान है, जिनमे पीपल/चीड़/शिकाकाई/सिल्वर ओक/अषोक प्रमुख है, जिनके कारण यह वाहिनी हरी-भरी एवं मनमोहक लगती है।
  4. संचार व्यवस्था- वाहिनी के तिब्बत एवं चाईना बार्डर पर ड्यूटी के समय इस वाहिनी की पोस्टों के साथ वायरलेस कर्मियों की ड्यूटी भी नियुक्त की जाती रही है, जिसके कारण इस वाहिनी में रेडियों संचार लगभग 125 अधिकारियों/कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता था। इस शाखा द्वारा पी0डब्लू0सी0सी0(पुलिस वायरलेस कम्यूनीकेशन कोड़) के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता था, जिसको सेना की सिंगनल कोर द्वारा मानिटरिंग किया जाता था, ताकि किसी गोपनीय सूचना को बिना कोड के तो आदान-प्रदान नही किया जा रहा है। इस शाखा को स्लोगन- (गति विषुद्धता एवं अधिकतम सुरक्षा के साथ संचार व्यवस्था)

अभिलेख

जैसा कि विदित है कि यह उत्तर प्रदेश की सबसे पुरानी वाहिनी है, जो अपनी संवेदनशील ड्यूटियों के सम्पादन हेतु जानी जाती है। इस वाहिनी में निम्नांकित महत्वपूर्ण अभिलेखों को वाहिनी अभिलेखालय में सुरक्षित रखा गया हैः

क्र0 अभिलेख का विवरण कब से
1 हिन्दी आदेश पुस्तिका दिनांक-01-08-1947 से 18-10-1954 तक अंग्रेजी हस्त लेख में। दिनांक-19-10-1954 से आज तक हिन्दी हस्त लेख में।
2 वाहिनी इतिहास पंजिका वर्ष-1962 से आज तक।
3 फाइल इन्डैक्स फाइल इन्डैक्स वष-1960 से अब तक।
4 पुलिस गजट वर्ष-1947 से अब तक
5 शासनादेशों की विभिन्न प्रतियॉ वर्ष-1952 से अब तक
6 विभिन्न गार्ड फाइल (उच्चाधिकारियों से प्राप्त दिषा निर्देश एवं परिपत्र आदि) वर्ष-1952 से अब तक

संक्षेपः

भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार वर्ष-1991 में स्पेशल पुलिस फोर्स के कर्तव्यों का हस्तान्तरण आई0टी0बी0पी0 को तथा भूमि व भवनों का हस्तान्तरण सेना को किया जा चुका है। वर्तमान समय में वाहिनी की कम्पनियों को देश एवं प्रदेश के विभिन्न जनपदों मे वीवीआईपी सुरक्षा, आवश्यक शान्ति व्यवस्था एवं आतंकवाद जैसी  महत्वपूर्ण सीमान्त ड्यूटियों के पत्यावर्तन के बाद इस इकाई की कम्पनियों द्वारा प्रदेश एवं देश के विभिन्न प्रदेशों में ड्यूटी सम्पादित की और इस वाहिनी के एक प्लाटून द्वारा 02-05-1995 से उत्तराखण्ड बनने तक बद्रीनाथ धाम की सुरक्षा हेतु नियुक्त किया गया, जिसकी बदली वाहिनी की अन्य कम्पनियों के प्लाटूनों ़द्वारा की जाती रही थी। एस0पी0एफ0 द्वारा 18000 फीट दुर्गम पहाडियों के मध्य भारतीय सेना की चौकियों से भी आगे अग्रिम सीमा पर स्कॉउट का कार्य कर विषम परिस्थितियों में रहते हुए 45 वर्शो तक भारत भूमि की रक्षा का सफल उत्तरदायित्व निभाया तथा धीरे धीरे अपनी सभी पोस्टो को भारत तिब्बत सीमा पुलिस को सौंप कर वर्श 1992 में एस0पी0एफ0 को  सीमा से वापस बुलाकर एक सामान्य  पीएसी वाहिनी में परिवर्तित कर दिया गया और एक गौरवशाली अद्वितिय वाहिनी एस0पी0एफ0 अर्थात सबसे प्यारी फोर्स़ का खामोश अन्त हो गया।

स्वर्णिम इतिहास की रचियता इस वाहिनी हेतु उपरोक्त अंकित पंक्तियॉ उन महान कार्यों के वर्णन हेतु अपर्याप्त हैं, किन्तु जनता एवं मीडिया की आलोचना के प्रिय पुलिस विभाग की इस वाहिनी द्वारा 45 वर्शो तक सम्पादित सीमा प्रहरी का कठिन दायित्व एवं कर्तव्य वेदी पर अपने 400 से अधिक वीर सपूतो का बलिदान निःसंदेह भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किये जाने योग्य है।

वाहिनी का स्लोगन-  एस0पी0एफ0 समय से आज तक रहा है- जय बद्री विशाल।

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले।

वतन पर मिटनें वालों का यही बाकी निशां होगा।।

सेनानायकों की नियुक्ती वर्ष-1995 से अब तकः

क्र0सं0 नाम सेनानायक कब से कब तक
1 श्री रामेश्वर दयाल 09.06.1994 19.07.1995
2 श्री राजदीप सिंह 14.07.1995 02.01.1996
3 श्री गुस्दर्शन सिंह 04.01.1996 31.07.1996
4 श्री प्रवीन कुमार 14.08.1996 20.04.1997
5 श्री रामनरायण सिंह 30.04.1997 02.06.1997
6 श्री अरूण कुमार 07.06.1997 12.06.1997
7 श्री गोपाल गुप्ता 04.07.1997 18.04.1998
8 श्री अशोक कुमार 18.04.1998 23.02.1999
9 श्री जवाहर लाल त्रिपाठी 11.04.1999 07.10.2002
10 श्री हरीशचन्द कश्यप 08.10.2002 08.02.2003
11 श्री दीपेश जुनेजा 11.02.2003 21.03.2003
12 श्री अशोक कुमार 23.03.2003 24.05.2003
13 श्री सुरेश चन्द धूशिया 30.05.2003 17.07.2003
14 श्री मुकुल गोयल 31.10.2003 12.02.2004
15 श्री आलोक शर्मा 17.02.2004 11.05.2005
16 श्री भजनीराम मीणा 21.05.2007 19.07.2007
17 श्री जय नारायण सिंह 04.05.2006 14.05.2007
18 श्री अजय आनन्द 16.05.2007 21.05.2007
19 श्री भजनीराम मीणा 21.05.2007 19.07.2007
20 श्री राजेश कुमार राय 15.12.2007 09.03.2008
21 श्री एन रविन्द्र 12.03.2008 13.04.2008
22 श्री अप्रणा एच0एस0 25.06.़2008 12.02.2009
23 श्री नवीन अरोड़ा 24.05.2008 10.06.2008
24 श्री पीयूष मोडिया 13.02.2009 13.07.2009
25 श्री अखिलेशवर राम मिश्र 11.08.2009 10.11.2010
26 श्री एन0 पदमजा 01.12.2010 15.01.2011
27 श्री अंकज शर्मा 15.01.2011 10.06.2011
28 श्री बी0के0 धोरे 28.06.2011 05.09.2011
29 श्रीमति बीना मुकेश 12.09.2011 16.02.2013
30 श्रीमति अप्रणा कुमार 16.02.2013 20.02.2014
31 श्रीमति पूनम श्रीवास्तव 21.02.2014 18.06.2014
32 श्री कलनिधि नैथानी 19.06.2014 29.01.2015
33 श्री डॉ0 एस0 चन्नपा 02.02.2015 16.05.2015
34 श्रीमति दीपिका तिवारी 23.05.2015 22.10.2016
35 श्री हैमन्त कुटियाल 27.10.2016 27.03.2017
36 डॉ0 प्रीतिन्दर 22.05.2017 06.07.2017
37 श्री जे0 रविन्द्र गौड 13.07.2017 18.03.2018
38 श्री सजीव त्यागी 26.03.2018 09.01.2019
39 श्री रविशंकर छवी 13.01.2019 03.07.2019
40 श्री अशोक कुमार 03.07.2019 03.06.2021
41 श्री अनुराग वत्स 06.06.2021 24.10.2021
42 श्री अतुल शर्मा 31.02.2021 28.12.2021
43 डॉ ख्याति गर्ग 29.12.2021 लगातार

वाहिनी के शिविरपाल,दलनायक एवं गुल्मनायक

वाहिनी के शिविरपाल, दलनायक एवं गुल्मनायक

क्र0सं0 पदनाम पीएनओ नाम मोबाईल नम्बर
1 शिविरपाल 050540437 मौ0 कासिम 9650690780
2 दलनायक 150470018 श्री निमेश कुमार 9411088113
3 दलनायक 160580031 श्री जगदीश जोशी 9415650918
4 गुल्मनायक 840710422 श्री चन्द्रपाल सिंह 8630169663
5 गुल्मनायक 860470089 श्री चन्द्रशेखर लोहनी 8273518445
6 गुल्मनायक 860540249 श्री परमानन्द 8430018600
7 गुल्मनायक 860740651 श्री वीरेन्द्र सिंह सिद्धू 8810468982
8 गुल्मनायक 870550096 श्री कलम सिंह 9528830016
9 गुल्मनायक 872530416 श्री पातीराम 9627323001
10 गुल्मनायक 880540391 श्री मनोहर सिंह 9412367339
11 गुल्मनायक 882121321 श्री गजेन्द्र सिंह 9719029151
12 गुल्मनायक 890550340 श्री महेश चन्द्र पाण्डे 7351883100
13 गुल्मनायक 890670127 श्री भगवानदीन 9389601645
14 गुल्मनायक 890730214 श्री धर्मवीर सिंह 9012707458
15 गुल्मनायक 892540309 श्री निर्दोष कुमार 9411928263
16 गुल्मनायक 910470102 श्री राजेश कुमार राजवंशी 9557657798
17 गुल्मनायक 910700289 श्री बरन सिह 6394133576
18 गुल्मनायक 920710238 श्री युनिस अली 7678510152
19 गुल्मनायक 920740143 श्री विक्रम सिंह 9058440830
20 गुल्मनायक 920760217 श्री यशपाल सिह 7599183620
21 गुल्मनायक 940460256 श्री जसपाल सिह 6398914052
22 गुल्मनायक 940540114 श्री नरेश कुमार 8077317900
23 गुल्मनायक 942691029 श्री ज्ञानेन्द्र सिंह 8057337294
24 गुल्मनायक 960750449 श्री वीरपाल 7505223774
25 गुल्मनायक 980440650 श्री जगदम्बा 9870702693
26 गुल्मनायक 982400267 श्री योगेन्द्र पाल सिंह 8433221609
27 गुल्मनायक 982411607 श्री ओमपाल सिंह 9455816156
28 गुल्मनायक 990770004 श्री राजेश कुमार 8317070681
29 गुल्मनायक 040500225 श्री जितेन्द्र सिंह 7017314722
30 गुल्मनायक 040500427 श्री दीपक कुमार 9411811616
31 गुल्मनायक 170440037 श्री जावेद अख्तर 7017756122
32 गुल्मनायक 190485654 श्री सुधांशु विश्नोई 8439084560
33 गुल्मनायक 190485667 श्री शलभ कुमार धीमान 7042048261
34 गुल्मनायक 190485683 श्री विजय चैधरी 7217608114
35 गुल्मनायक 190485696 श्री निर्मल कुमार 8285022986
36 गुल्मनायक 190485700 श्री आशीष वशिष्ठ 9058943324
37 गुल्मनायक 190485713 श्री गौैरव कुमार 7985052161
38 गुल्मनायक 210480018 श्री योगेश कुमार 9412683933
39 गुल्मनायक 210483974 मो0 दानिश खान 8851147511
40 गुल्मनायक 210483987 श्री सुरेन्द्र सिंह 6398665720
41 गुल्मनायक 231276638 श्री शौर्य देव शनी 8630372051
42 गुल्मनायक 231276872 श्री अनन्त कुमार 8630462057
43 गुल्मनायक 231277354 श्री राहुल कुमार 8445630810
44 गुल्मनायक 231277468 श्री नीरज कुमार 9627122402
45 गुल्मनायक 231277673 श्री सौरभ पैसल 9897263705
46 गुल्मनायक 231277774 श्री तुषार चैधरी 8929784613
47 गुल्मनायक 231277862 श्री बन्टी कुमार 9548704606
48 गुल्मनायक 231277918 श्री नरेन्द्र प्रताप 9675108984
49 गुल्मनायक 231277921 श्री कपिल सलोनिया 9536742220
50 गुल्मनायक 231278197 श्री धीरज कुमार चैहान 8476052638
51 गुल्मनायक 231278429 श्री गौरव सिंह 8958653884
52 गुल्मनायक 231278810 श्री निशिकांत गौरव 7302607448
53 गुल्मनायक 231279174 श्री विशाल परमार 6395178586
54 गुल्मनायक 231279259 श्री योगेश कुमार कौशिक 9045555524